// शुरुआती लोगों के लिए कोर्स
AI से डरिए मत
पाँच छोटे पाठ: ChatGPT और दूसरे AI सहायकों को कैसे इस्तेमाल करें — सुरक्षित तरीक़े से, अपने काम के लिए और बिना किसी उलझन के। यह माता-पिता, दोस्तों और उन सबके लिए लिखा गया है, जिन्होंने इसे अभी तक आज़माया नहीं है।
इसे कैसे इस्तेमाल करें
सब कुछ एक ही शाम में पढ़ने की ज़रूरत नहीं है
हर पाठ में 10 से 15 मिनट लगते हैं। सबसे अच्छा तरीक़ा यह है: एक पाठ पढ़िए, उसे तुरंत अपने कंप्यूटर या फ़ोन पर आज़माइए, और अगला पाठ अगले दिन पढ़िए।
जिन गहरे रंग के ख़ानों में "कॉपी करें" बटन है, वे तैयार सवाल हैं। बटन दबाइए, सवाल को चैट में चिपकाइए (पेस्ट कीजिए), और रंगीन हिस्सों की जगह अपनी बात लिखिए। बस इतना ही।
पाठ 4 और 5 को मत छोड़िए। पहले तीन पाठ सिखाते हैं कि इसे कैसे इस्तेमाल करें; आख़िरी दो सिखाते हैं कि ख़ुद को नुक़सान से कैसे बचाएँ।
सामग्री
डाउनलोड कीजिए और छापिए
यही पाठ दूसरे रूपों में — कंप्यूटर के पास रखने के लिए, या किसी को आमने-सामने सिखाने के लिए।
विषय-सूची
AI चैट क्या है और यह क्या कर सकता है
यहाँ सबसे ज़रूरी बात यह समझना है कि यह चीज़ असल में क्या है — और क्या बिल्कुल नहीं है। नए लोगों की आधी परेशानियाँ ठीक इसी से शुरू होती हैं।
आसान भाषा में, बिना कठिन शब्दों के
AI का मतलब है आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता। AI चैट (ChatGPT, Claude, Gemini) एक ऐसा प्रोग्राम है, जो यह अंदाज़ा लगाने में बहुत माहिर है कि अगला शब्द कौन-सा आना चाहिए। इसे बहुत बड़ी मात्रा में लिखी हुई चीज़ें पढ़ाकर सिखाया गया है, और इसने किसी भी लिखी हुई बात को उसी तरह आगे बढ़ाना सीख लिया है, जैसे कोई इंसान बढ़ाता।
इससे तुरंत दो बातें निकलती हैं:
- शब्दों के काम में यह कमाल का है। किसी बात को दोबारा लिखना, छोटा करना, ज़्यादा आसान करके समझाना, अनुवाद करना, चिट्ठी का मसौदा बनाना, कोई सूची सोचकर देना — यही इसका असली मैदान है।
- यह तथ्यों को उस तरह "जानता" नहीं, जैसे कोई जानकारी वाली किताब जानती है। यह उन्हें याद के सहारे फिर से जोड़ता है — और कभी-कभी ग़लत जोड़ देता है, और वह भी ठीक उसी भरोसे के साथ, जिस भरोसे से वह सही बात बताता है।
कल्पना कीजिए एक ऐसे सहायक की, जो ख़ूब पढ़ा-लिखा है, बहुत विनम्र है और ग़ज़ब का तेज़ है, जिसने आधी लाइब्रेरी पढ़ रखी है — लेकिन वह जाकर कुछ भी दोबारा जाँच नहीं सकता, क्योंकि किताबें उसके पास नहीं हैं। वह ईमानदारी से याद करने की कोशिश करता है। कभी-कभी उसे ठीक-ठीक याद आ जाता है। कभी-कभी वह कुछ ऐसा गढ़ देता है जो सुनने में सही लगता है। और उसकी आवाज़ के लहजे से आप यह नहीं पहचान सकते कि कौन-सी बात सही है और कौन-सी गढ़ी हुई।
यह किन कामों में अच्छा है
| काम | रोज़मर्रा का उदाहरण |
|---|---|
| कोई मुश्किल बात आसान शब्दों में समझाना | "इस बिजली के बिल में असल में क्या लिखा है?", "मुझे गाड़ी का बीमा ऐसे समझाइए, जैसे मैं पाँच साल का बच्चा हूँ" |
| कुछ लिखकर देना | दुकान से शिकायत, सोसाइटी के दफ़्तर को चिट्ठी, जन्मदिन की बधाई, अपने डॉक्टर के लिए छोटा-सा संदेश |
| लंबी चीज़ को छोटा करना | 20 पन्नों का अनुबंध (एग्रीमेंट) — आधे पन्ने में, सिर्फ़ ज़रूरी बातें |
| अनुवाद करना | अंग्रेज़ी या किसी दूसरी भाषा में आई चिट्ठी, मिक्सी या गीज़र के साथ आई निर्देशों की किताब, विदेश में होटल का मेन्यू |
| किसी फ़ोटो को समझना | दवा के साथ आए पर्चे या वॉशिंग मशीन के बटनों की फ़ोटो खींचिए, फिर उसके बारे में पूछिए |
| चुनने और तुलना करने में मदद | फ़्रिज के तीन विकल्प, एक तालिका में, ख़ूबियों और कमियों के साथ |
| योजना बनाना | कोई यात्रा, पूरे हफ़्ते में क्या-क्या पकाना है, घर बदलने से पहले के कामों की सूची |
| कुछ सिखाना | "सरकारी सेवाओं की वेबसाइट इस्तेमाल करना समझाइए", "मेरे साथ अंग्रेज़ी बोलने का अभ्यास कीजिए" |
यह किन कामों में कमज़ोर है — और यह बात कोई नहीं बताता
- सटीक संख्याएँ, तारीख़ें, दाम, क़ानून, आँकड़े — सबसे ज़्यादा ग़लतियाँ यहीं होती हैं। हमेशा ख़ुद जाँचिए।
- बीमारी का पता लगाना (डायग्नोसिस) और दवा की ख़ुराक। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (अमेरिका के डॉक्टरों का संगठन) ने साफ़ शब्दों में कहा है: AI चैटबॉट आपके डॉक्टर का विकल्प नहीं है और इमरजेंसी के लिए नहीं है। जाँच की रिपोर्ट में लिखे किसी शब्द का मतलब क्या है, यह पूछना — ठीक है। मुझे कौन-सी दवा लेनी चाहिए, यह पूछना — नहीं।
- क़ानूनी और पैसों से जुड़े फ़ैसले। किसी अनुबंध को समझना — हाँ। वकील से पूछे बिना AI की सलाह पर अमल करना — नहीं।
- ताज़ा ख़बरें — जब तक इंटरनेट पर खोजने की सुविधा, यानी वेब सर्च, चालू न हो (इस पर और बात पाठ 4 में)।
- असली लोगों से मेल-जोल की जगह लेना। इस पर पाठ 4 के आख़िर में खुलकर और ईमानदारी से बात की गई है।
कौन-सी सेवा चुनें
बड़ी सेवाएँ तीन हैं। तीनों मुफ़्त में भी अच्छी तरह काम करती हैं — पैसे देना ज़रूरी नहीं है, ख़ासकर शुरुआत में।
| ChatGPT OpenAI |
Claude Anthropic |
Gemini | |
|---|---|---|---|
| मुफ़्त वर्ज़न | हाँ | हाँ | हाँ |
| पैसे वाला वर्ज़न, हर महीने | $8 (Go) / $20 (Plus) | $20 (Pro) | ~$5 (AI Plus) / ~$20 (AI Pro) |
| बोलकर बातचीत | हाँ | हाँ | हाँ |
| फ़ोटो समझता है | हाँ | हाँ | हाँ |
| तस्वीरें बनाता है | हाँ | नहीं | हाँ |
| इंटरनेट पर खोजता है | हाँ | हाँ | हाँ |
| मुफ़्त वर्ज़न में विज्ञापन | हाँ, और ऐसे देशों की गिनती बढ़ती जा रही है | नहीं | नहीं |
| सबसे बड़ी ख़ूबी | हर तरह के काम के लिए, सबसे ज़्यादा हुनर | लंबे दस्तावेज़ों पर ध्यान से काम | Gmail, Docs और Android में पहले से जुड़ा हुआ |
ChatGPT से शुरू कीजिए। इसे सबसे ज़्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं, इसके बारे में सबसे ज़्यादा सुझाव मिलते हैं, और अगर कुछ गड़बड़ हो जाए, तो आपकी जान-पहचान का लगभग कोई भी आपकी मदद कर पाएगा। बाद में मन करे, तो बाक़ी दोनों भी आज़माइए: अकाउंट मुफ़्त बनते हैं, आपका कुछ नहीं जाता।
मॉडल के नामों से घबराइए मत
हर सेवा के अंदर एक ड्रॉपडाउन सूची (दबाने पर नीचे की ओर खुलने वाली सूची) होती है, जिसमें उलझाने वाले नाम भरे होते हैं: GPT-5.6 Sol, GPT-6 Pro, Claude Sonnet 5.5, Claude Opus 5.5, Gemini 3.6 Flash… इनके लिए नियम आसान है:
- कुछ भी मत बदलिए। सेवा अपने-आप ऐसा मॉडल चुन लेती है जो 95% कामों के लिए सही है।
- इनमें फ़र्क़ मोटे तौर पर बस इतना है: एक "तेज़ और अच्छा" है, दूसरा "थोड़ा धीमा, पर मुश्किल सवालों में थोड़ा बेहतर"। रोज़मर्रा के सवालों में आपको यह फ़र्क़ पता भी नहीं चलेगा।
- Thinking / Reasoning / Extended — इन शब्दों का मतलब है "थोड़ा ज़्यादा देर तक सोचो"। इन्हें तभी चालू कीजिए, जब काम सच में मुश्किल हो — कोई हिसाब-किताब, अनुबंध को बारीकी से पढ़ना, कोई उलझी हुई तुलना।
लगभग निश्चित रूप से हाँ। ChatGPT, Claude और Gemini — तीनों भारत में सामान्य रूप से चलते हैं, और खाड़ी देशों, ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में भी। हिंदी के लिए भी तीनों तैयार हैं: ChatGPT का मेन्यू हिंदी में आ सकता है, Google हिंदी को Gemini की भाषाओं में गिनता है, और Anthropic के मुताबिक़ Claude हिंदी में अच्छा काम करता है।
हर कंपनी अपनी वेबसाइट पर उन देशों की सूची देती है जहाँ वह सेवा देती है — पैसे देने से पहले अपना देश देख लीजिए: OpenAI · Anthropic · Google। OpenAI साफ़ लिखता है कि जिस देश में सेवा नहीं है, वहाँ से इस्तेमाल करने पर खाता बंद हो सकता है।
अगर कभी पैसे देने हों (ज़रूरी नहीं है): ChatGPT के Go और Plus प्लान का भुगतान भारत में UPI से हो सकता है। Claude वेबसाइट पर सिर्फ़ क्रेडिट या डेबिट कार्ड लेता है और कीमत डॉलर में है, इसलिए बैंक विदेशी लेन-देन का शुल्क ले सकता है। भारत में Google AI Plus ₹399 और Google AI Pro ₹1,950 प्रति माह है। Google ने अक्टूबर 2025 में घोषणा की थी कि Jio के अनलिमिटेड 5G प्लान वालों को AI Pro 18 महीने बिना अतिरिक्त शुल्क मिलेगा — यह ऑफ़र सिर्फ़ MyJio ऐप में ही देखें और चालू करें, किसी लिंक या मैसेज से नहीं: "मुफ़्त AI" के नाम पर ठगी भी होती है।
chatgpt.com खोलिए और कोई भी सेटिंग बदले बिना बस एक सवाल पूछिए: "आसान शब्दों में बताइए कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आप किन-किन कामों में मेरी मदद कर सकते हैं। 10 छोटे-छोटे उदाहरण दीजिए।" बस देखिए कि जवाब में क्या आता है।
पहले क़दम और ज़रूरी सेटिंग्स
खाता बनाने (साइन अप) में तीन मिनट लगते हैं। सेटिंग्स ठीक करने में पाँच मिनट और। ये पाँच मिनट ज़रूर लगाइए: इन्हीं से तय होता है कि बाद में आपकी बातचीत का क्या होगा।
क़दम 1. ऐप इंस्टॉल करें — और नक़ली ऐप से बचें
यह पूरे कोर्स का सबसे ख़तरनाक हिस्सा है। मई 2026 में Kaspersky ने बताया कि चार महीनों में 92,000 से ज़्यादा हमले ऐसे ख़तरनाक और अनचाहे प्रोग्रामों से हुए, जो AI सेवाओं का भेस बनाकर आए थे: इनमें से 49% ChatGPT होने का दिखावा कर रहे थे, 18% Claude और 18% Gemini। नक़ली ऐप तो समस्या हैं ही, और ख़ास तौर पर कंप्यूटर के नक़ली इंस्टॉलर भी (इंस्टॉलर वह फ़ाइल होती है जिससे कोई प्रोग्राम कंप्यूटर में डाला जाता है)। ऐसे नक़ली इंस्टॉलर सर्च के नतीजों में दिख जाते हैं।
- किसी लिंक से कभी इंस्टॉल न करें। न ईमेल के लिंक से, न किसी मैसेज के लिंक से, न वीडियो के नीचे लिखे विवरण के लिंक से। ऐप स्टोर ख़ुद खोलिए और वहाँ नाम लिखकर ढूँढिए। Android फ़ोन पर ऐसी कोई फ़ाइल कभी इंस्टॉल न करें जिसके नाम के आख़िर में .apk हो और जो किसी ने आपको भेजी हो या कोई वेबसाइट दे रही हो।
- डेवलपर (ऐप बनाने वाली कंपनी) का नाम देखिए — यही सबसे अच्छी जाँच है। नाम ठीक यही होना चाहिए: ChatGPT → OpenAI या OpenAI OpCo, LLC, Claude → Anthropic PBC, Gemini → Google LLC (Apple के App Store में यह सिर्फ़ Google दिखता है)। नक़ली ऐप में नाम ऐसे लिखे होते हैं: "OpenAl" (बड़े I की जगह अंग्रेज़ी का छोटा l), "Open AI Inc", "ChatGPT Team"।
- देखिए कि ऐप कितनी बार इंस्टॉल हुआ है (Google Play यह दिखाता है; Apple का App Store सिर्फ़ रेटिंग दिखाता है)। असली ऐप: ChatGPT और Gemini एक अरब से ज़्यादा बार इंस्टॉल हुए हैं, Claude 50 मिलियन से ज़्यादा बार। जिस "ChatGPT" के कुछ हज़ार ही इंस्टॉल हों, वह ChatGPT नहीं है।
- हर हफ़्ते पैसे कटने वाली सदस्यता (सब्सक्रिप्शन) लगभग हमेशा ठगी होती है। असली सेवाएँ महीने या साल के हिसाब से पैसे लेती हैं। हफ़्ते के $6 का मतलब है साल के $312 — उस चीज़ के लिए जो मुफ़्त मिलती है।
आधिकारिक पते — इन्हें ब्राउज़र में ख़ुद हाथ से टाइप कीजिए:
- ChatGPT — chatgpt.com · ऐप: chatgpt.com/download
- Claude — claude.ai · ऐप: claude.com/download
- Gemini — gemini.google.com
एक बात और: कंप्यूटर के लिए Gemini ऐप Mac पर (अप्रैल 2026 से) और Windows पर (सितंबर 2026 से) मौजूद है। इसे सिर्फ़ Google के अपने पेज gemini.google/desktop से डाउनलोड करें — पता हाथ से टाइप करें। Windows पर यह Alt+Space दबाने से खुलता है और Mac पर Option+Space से। Google के मुताबिक़ Mac वाले ऐप के लिए Apple चिप वाला MacBook और macOS 15 या उसके बाद का वर्ज़न चाहिए; किसी और कंप्यूटर पर आप ब्राउज़र में सीधे gemini.google.com खोल सकते हैं। नक़ली प्रोग्राम भी यही नाम रखते हैं, इसलिए सर्च करके मिली किसी साइट से "Gemini" का इंस्टॉलर कभी डाउनलोड न करें।
क़दम 2. साइन अप करें (खाता बनाएँ)
- साइट या ऐप खोलिए → Sign up दबाइए।
- अगर आपके पास Gmail वाला ईमेल पता है, तो सबसे आसान रास्ता है Google से जारी रखें वाला बटन (उस पर Google का नाम लिखा होता है)। तब आपको नया पासवर्ड बनाना और याद रखना नहीं पड़ेगा।
- अपने ईमेल या फ़ोन नंबर की पुष्टि कीजिए, यानी पक्का कीजिए कि वह आपका ही है (ईमेल पर एक लिंक वाला मेल आएगा)।
- हो गया। अब आप इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं। पैसे देने के लिए ख़ुद को मनाने की ज़रूरत नहीं — मुफ़्त वर्ज़न आपके लिए लंबे समय तक काफ़ी रहेगा।
क़दम 3. पाँच सेटिंग्स जिन्हें तुरंत देख लेना चाहिए
1. अपनी बातचीत से मॉडल को सिखाना (ट्रेनिंग) बंद करें
जब तक आप ख़ुद न बदलें, आपकी बातचीत का इस्तेमाल मॉडल को बेहतर बनाने में हो सकता है — और इसका मतलब है कि उसे लोग पढ़ भी सकते हैं। एक स्विच से यह बंद हो जाता है, और इससे जवाबों की क्वालिटी पर कोई असर नहीं पड़ता।
| सेवा | कहाँ जाएँ |
|---|---|
| ChatGPT | प्रोफ़ाइल आइकन (आपके नाम या फ़ोटो वाला गोल निशान) → Settings → Data controls → Improve the model for everyone को बंद करें। फ़ोन पर: किनारे वाला मेन्यू → प्रोफ़ाइल आइकन → Data Controls। |
| Claude | Settings → Privacy → Help Improve our AI models → बंद करें। सीधा लिंक: claude.ai/settings/data-privacy-controls |
| Gemini | कंप्यूटर पर: Settings & help → Activity → "On" पर क्लिक करें → Turn off। फ़ोन पर: मेन्यू → प्रोफ़ाइल फ़ोटो → Gemini Apps Activity। और स्विच का अपना नाम Keep Activity है — अलग-अलग नामों से उलझिए मत। |
- Claude: अगर ट्रेनिंग चालू है, तो आपका डेटा 5 साल तक रखा जा सकता है — पहचान हटाकर, यानी वे ब्योरे निकालकर जिनसे पता चले कि यह आपका है। अगर ट्रेनिंग बंद है, तो इतने लंबे समय तक नहीं रखा जाता, लेकिन आपकी बातचीत तब तक आपकी हिस्ट्री (पुरानी बातचीत की सूची) में रहती है जब तक आप उसे ख़ुद डिलीट न करें। डिलीट करने के बाद 30 दिनों के अंदर वह हमेशा के लिए मिटा दी जाती है।
- Gemini: Activity वाली सेटिंग बंद होने पर Google की सेवाओं — Gmail, Calendar, Drive और Google Workspace के दूसरे ऐप — से उसके कुछ जुड़ाव काम करना बंद कर देते हैं, और मेमोरी भी बंद हो जाती है। बातचीत फिर भी 72 घंटे तक रखी जाती है।
- Gemini, Google के अपने सहायता पेजों के हवाले से: कुछ चैट असली इंसान — समीक्षक (रिव्यूअर) — पढ़ते हैं, और वे चैट आपकी हिस्ट्री के साथ डिलीट नहीं होतीं — उन्हें तीन साल तक रखा जाता है। Google की अपनी सलाह: "कृपया ऐसी कोई भी गोपनीय जानकारी न डालें, जिसके बारे में आप नहीं चाहेंगे कि कोई समीक्षक उसे देखे या Google उसका इस्तेमाल हमारी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करे, जिनमें मशीन-लर्निंग तकनीकें भी शामिल हैं।"
2. मेमोरी को समझ लें
तीनों सेवाएँ एक बातचीत से दूसरी बातचीत तक आपके बारे में बातें याद रख सकती हैं — कि आपका नाम फ़लाँ है, कि आपके घर में बिल्ली है, कि आपको छोटे जवाब पसंद हैं। इसे मेमोरी (याददाश्त) कहते हैं। इससे सुविधा भी होती है, और साथ ही थोड़ी बेचैनी भी।
- ChatGPT: Settings → Personalization → Memory। OpenAI की चेतावनी: किसी बात को पूरी तरह मिटाने के लिए मेमोरी से उसे डिलीट करना काफ़ी नहीं है — जिन बातचीतों में उसका ज़िक्र हुआ था, उन्हें भी डिलीट करना होगा।
- Claude: Settings → Memory। मेमोरी के नए सिस्टम में बातचीत डिलीट करने से उससे याद रखी गई बातें डिलीट नहीं होतीं — उन्हें अलग से मिटाना पड़ता है।
- Gemini: Settings & help → Personal Intelligence → Memory। Google यह नया नाम अभी धीरे-धीरे सब तक पहुँचा रही है, इसलिए कुछ खातों में इसकी जगह Personal context दिखता है।
एक सलाह: हर दो-एक महीने में वहाँ झाँककर देख लीजिए और जो ज़रूरी न हो, उसे डिलीट कर दीजिए। ख़ास तौर पर तब, जब आप नाती-पोतों को चैट से खेलने देते हों।
3. टेम्परेरी चैट इस्तेमाल करना सीखें
टेम्परेरी चैट (अस्थायी चैट) एक ऐसा मोड है जिसमें बातचीत आपकी चैट हिस्ट्री में नहीं रहती, मेमोरी में नहीं जाती और ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल नहीं होती। फिर भी कंपनी सुरक्षा जाँच के लिए 30 दिन तक उसकी एक कॉपी रखती है, यानी यह ज़्यादा निजी है, पर पूरी तरह छिपा हुआ नहीं। इसके बावजूद, किसी भी निजी बात के लिए — सेहत, पैसा, घर-परिवार के मामले — यही सबसे अच्छा तरीक़ा है।
- ChatGPT: नई चैट में, ऊपर दाईं ओर Temporary बटन।
- Claude: ऊपर दाईं ओर भूत वाला आइकन (इनकॉग्निटो, यानी छिपकर बात करने वाला मोड)। यह तब भी काम करता है जब ट्रेनिंग चालू हो।
- Gemini: "New chat" के बगल में — Temporary chat।
4. दो-चरणीय लॉगिन चालू करें
दो-चरणीय लॉगिन का मतलब है कि पासवर्ड के बाद सेवा एक दूसरा, एक बार का कोड (OTP) माँगती है — किसी ऐप से या SMS से। जो आपका पासवर्ड चुरा भी ले, वह आपके फ़ोन के बिना फिर भी अंदर नहीं जा सकता।
- ChatGPT: Settings → Security → Multi-factor authentication। वहीं एक काम का बटन Log out of all devices भी है — इससे आप एक साथ हर फ़ोन और कंप्यूटर पर अपने खाते से बाहर निकल जाते हैं।
- Claude: इसका अपना दो-चरणीय लॉगिन नहीं है — आप Google के ज़रिए या अपने ईमेल पर आए लिंक से लॉगिन करते हैं। यानी आपका Claude ठीक उतना ही सुरक्षित है जितना आपका ईमेल: दो-चरणीय लॉगिन वहीं चालू कीजिए।
- Gemini: इसकी सुरक्षा आपके Google खाते की सेटिंग्स पर टिकी है।
ChatGPT में Advanced Account Security नाम का एक मोड है — इसमें लॉगिन सिर्फ़ पासकी (पासवर्ड की जगह आपके फ़ोन या लैपटॉप में रखी एक डिजिटल चाबी) से होता है या किसी असली, हाथ में पकड़ी जाने वाली सुरक्षा-चाबी से; न पासवर्ड होता है, न ईमेल या SMS से खाता वापस पाने का रास्ता। यह उन लोगों के लिए बना है जिन पर निशाना बनाकर हमले होने का ख़तरा ज़्यादा है, जैसे पत्रकार और सरकार की आलोचना करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ता। इसमें कम से कम दो चाबियाँ सेट करनी पड़ती हैं और खाता वापस पाने वाली रिकवरी चाबियाँ सँभालकर रखनी पड़ती हैं। रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लिए: इसे चालू न करें। अगर आपकी सारी चाबियाँ और रिकवरी चाबियाँ खो गईं, तो OpenAI की चेतावनी है कि खाता हमेशा के लिए हाथ से जा सकता है।
5. ChatGPT में विज्ञापन — 2026 में नया
ChatGPT में विज्ञापन 9 फ़रवरी 2026 को आए — मुफ़्त वर्ज़न में और Go प्लान में। शुरुआत अमेरिका से हुई और ये तेज़ी से फैले: सितंबर 2026 में OpenAI ने बताया कि ChatGPT के विज्ञापन 60 से ज़्यादा देशों में उपलब्ध हैं, जिनमें ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान, ब्राज़ील, मेक्सिको और दक्षिण-पूर्व एशिया का बड़ा हिस्सा शामिल है, और उसने 31 यूरोपीय देशों में भी इन्हें लाने का एलान किया है। यह सूची बढ़ती जा रही है। पैसे वाले Plus और Pro प्लान में विज्ञापन नहीं होते। विज्ञापन देने वाले आपकी बातचीत नहीं देख सकते, लेकिन कौन-सा विज्ञापन दिखे, यह आपकी बातचीत के आधार पर चुना जा सकता है।
अगर आपके देश में अभी विज्ञापन नहीं आए हैं, तो आपको कोई विज्ञापन नहीं दिखेगा, और आपकी सेटिंग्स में "Ad Controls" वाला विकल्प होगा ही नहीं। यह सामान्य बात है, आपने कुछ ग़लत नहीं किया।
- विज्ञापनों की सेटिंग (जहाँ विज्ञापन चालू हैं): Settings → Ad Controls।
- एक मुफ़्त विकल्प ऐसा भी है जिसमें बिल्कुल विज्ञापन नहीं होते — OpenAI इसे हर उस जगह देती है जहाँ विज्ञापन चलते हैं। बदले में आपकी सीमाएँ (आप कितना इस्तेमाल कर सकते हैं) कम हो जाती हैं, साथ ही तस्वीरें बनाने और गहरी खोज (डीप रिसर्च) की सुविधा नहीं मिलती। रोज़ के ज़्यादातर कामों के लिए यह चल जाता है।
पाँच बटन जिन्हें देखते ही पहचान लेना चाहिए
| बटन | किस काम का है |
|---|---|
| पेपरक्लिप / प्लस (+) | फ़ोटो, PDF या कोई दस्तावेज़ अटैच करना (जोड़ना)। यह इसकी सबसे काम की ख़ूबियों में से एक है — दस्तावेज़ को अपने शब्दों में समझाने के बजाय उसे सीधे जोड़ दीजिए। |
| माइक्रोफ़ोन | टाइप करने के बजाय बोलना। अगर टाइप करना मुश्किल लगता है, तो यह बहुत बड़ी राहत है। यह तीनों सेवाओं में काम करता है, फ़ोन पर भी और कंप्यूटर पर भी। |
| ग्लोब (गोला) / "Search" | इंटरनेट पर खोजना। इससे मनगढ़ंत जवाब बहुत कम हो जाते हैं। यह अक्सर अपने-आप चालू हो जाता है, लेकिन आप इसे ख़ुद भी चालू कर सकते हैं। |
| नई चैट (New chat) | बिल्कुल नए सिरे से बात शुरू करना। नियम: नया विषय, नई चैट। वरना पिछली बातचीत की बातें नए जवाबों में घुसकर उन्हें उलझा देती हैं। |
| मैसेज के पास तीन बिंदु | जवाब कॉपी करना, उसे दोबारा बनवाना, उसे रेटिंग देना। |
एजेंट मोड: जब चैट आपका काम ख़ुद कर देती है
अब तीनों सेवाओं में एक ऐसा मोड है जो सिर्फ़ जवाब देने से आगे जाता है। आप कोई काम बताते हैं, और सहायक उसे ख़ुद पूरा करता है: वह वेबसाइटें खोलता है, बटन दबाता है, फ़ॉर्म भरता है, आपके कंप्यूटर की फ़ाइलें पढ़ता और बदलता है, और किसी काम को तय समय पर बार-बार दोहरा भी सकता है। इस तरह ख़ुद काम करने वाले सहायक को एजेंट कहते हैं। ChatGPT में इस मोड का नाम Work है। Claude अपने वर्ज़न Cowork को सामान्य Claude ऐप में ही मिला रहा है, जो अब ख़ुद काम हाथ में ले लेता है; इसके अलावा Claude के पास Claude in Chrome भी है। Gemini में इसका नाम Spark है। इनमें से ज़्यादातर के लिए पैसे वाला प्लान चाहिए: ChatGPT के मुफ़्त और Go प्लान में कंप्यूटर वाले ऐप में सिर्फ़ सीमित Work मोड मिलता है, उस ब्राउज़र के बिना जो आपके लिए वेबसाइटों पर जाता है। Spark के लिए Google AI Pro या Ultra प्लान चाहिए और Keep Activity सेटिंग चालू होनी चाहिए — वही, जिसे यह पाठ बंद करने की सलाह देता है। साथ ही, Spark यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र (यूरोपीय संघ के देश और नॉर्वे, आइसलैंड व लिख्टेनश्टाइन), स्विट्ज़रलैंड, ब्रिटेन और नाइजीरिया में उपलब्ध नहीं है। आपको एजेंट की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है — इस कोर्स की हर बात सामान्य चैट में काम करती है।
इसमें ज़्यादा सावधानी क्यों चाहिए: चैट में ग़लती बस एक ग़लत वाक्य होती है, जिसे आप अनदेखा कर सकते हैं। एजेंट की ग़लती एक काम होती है — भेजा जा चुका मैसेज, डिलीट हो चुकी फ़ाइल, जमा हो चुका फ़ॉर्म। Google ने इसे साफ़ शब्दों में कहा है: Gemini "ग़लतियाँ कर सकता है और ऐसे काम कर सकता है जिनकी उम्मीद न हो"। एजेंटों को निशाना बनाने वाली एक नई चाल भी है। किसी वेब पेज, ईमेल या दस्तावेज़ में ऐसे छिपे हुए निर्देश हो सकते हैं जो आपके लिए नहीं, बल्कि AI के लिए लिखे गए हों — मसलन, AI से यह कहना कि आपकी बात को अनदेखा करो और आपकी फ़ाइलें किसी और को भेज दो। इसे प्रॉम्प्ट इंजेक्शन कहते हैं (प्रॉम्प्ट यानी वह सवाल या निर्देश जो आप टाइप करते हैं), और तीनों कंपनियाँ इसके बारे में चेतावनी देती हैं। ChatGPT में Lockdown Mode नाम का एक मोड है (Settings → Security में), जिसे आप चाहें तो चालू कर सकते हैं। इस ख़तरे को कम करने के लिए यह मोड इंटरनेट तक ChatGPT की पहुँच घटा देता है; OpenAI के मुताबिक़ यह उन लोगों के लिए है जो संवेदनशील जानकारी सँभालते हैं, और यह हर हमले को नहीं रोकता।
- चैट में पासवर्ड, कार्ड नंबर या सुरक्षा कोड (जैसे OTP) कभी टाइप न करें। OpenAI और Google दोनों की यही सलाह है। जब किसी साइट को इनकी ज़रूरत होती है, तो ChatGPT और Gemini रुक जाते हैं, ताकि आप इन्हें ख़ुद उस साइट के अपने लॉगिन या पेमेंट फ़ॉर्म में टाइप कर सकें।
- इसे अपने पैसों और निजी काग़ज़ात से दूर रखें। इसे अपने बैंक की वेबसाइट पर न भेजें, और ऐसे फ़ोल्डर न दें जिनमें बैंक स्टेटमेंट, पासवर्ड या आपके दस्तावेज़ों की स्कैन कॉपी हों। Anthropic की सलाह: एजेंट को उसका अपना एक अलग फ़ोल्डर दें और फ़ाइलों की बैकअप (अतिरिक्त) कॉपी रखें, क्योंकि एजेंट फ़ाइलें हमेशा के लिए डिलीट कर सकता है।
- वे सेटिंग्स चालू रहने दें जिनसे वह पहले आपसे पूछता है। ChatGPT कोई नई वेबसाइट खोलने से पहले पूछता है, और जो सेटिंग उसे हर साइट पर जाने देती है, उसके बारे में ख़ुद OpenAI कहती है कि इसकी सलाह नहीं दी जाती। किसी काम को मंज़ूरी देने से पहले पढ़ लें कि वह क्या करने जा रहा है — ख़ास तौर पर अगर वह कुछ भेजने, डिलीट करने, ख़रीदने या जमा करने वाला हो।
- उस पर नज़र रखें, और भटके तो रोक दें। अगर वह ऐसी कोई साइट या फ़ाइल खोले जिसका आपने ज़िक्र नहीं किया था, तो काम रोक दें। OpenAI और Anthropic की भी यही सलाह है।
- ऐसा कोई काम तय समय पर चलने के लिए न छोड़ें जिसे पलटा न जा सके। तय समय वाला काम तब चलता है जब आप वहाँ नहीं होते, और Google की चेतावनी है कि हो सकता है आप किसी ग़लत काम को समय पर रोक न पाएँ। न अपने-आप जाने वाले मैसेज, न अपने-आप होने वाले पेमेंट, न अपने-आप फ़ाइलें डिलीट होना।
पाँचों सेटिंग्स एक-एक करके देख लीजिए। फिर किसी भी काग़ज़ की फ़ोटो खींचिए — कोई बिल, इस्तेमाल के निर्देशों वाला काग़ज़, कोई लेबल — उसे पेपरक्लिप से जोड़िए और पूछिए: "इसमें क्या लिखा है और इसका मतलब क्या है? आसान शब्दों में समझाइए।" आम तौर पर यही वह पल होता है जब अचानक समझ आता है कि यह चीज़ किस काम की है।
सही तरीक़े से कैसे पूछें
जवाब "बेकार" निकलेगा या "वाह" कहने लायक — यह लगभग हमेशा इस पर निर्भर करता है कि सवाल किन शब्दों में पूछा गया। अच्छी ख़बर यह है कि सीखने को बहुत कम है, और इंटरनेट पर मिलने वाली आधी सलाह पहले ही पुरानी हो चुकी है।
पहले यह जानिए कि क्या बिल्कुल नहीं करना है
इंटरनेट पर ढेरों "गुप्त नुस्ख़े" घूम रहे हैं। इनमें से ज़्यादातर को परखा जा चुका है — आज के AI मॉडलों के साथ इनसे कोई फ़ायदा नहीं होता। इन पर अपनी मेहनत बर्बाद न करें:
- "आप 20 साल के अनुभव वाले विशेषज्ञ हैं…" — Anthropic इसे उन तरीक़ों में रखती है जिनके बारे में "आपने शायद सुना होगा", और कहती है कि आज के मॉडलों को अक्सर ज़ोर देकर कोई भूमिका देने की ज़रूरत नहीं होती। बेहतर है यह बताना कि किस नज़रिए से देखना है: "इस अनुबंध (एग्रीमेंट) को इस नज़र से पढ़िए कि इसमें मेरे लिए क्या जोखिम हैं"। हाँ, लहजा तय करने के लिए ("ऐसे समझाइए जैसे डॉक्टर मरीज़ को समझाता है") भूमिका देना अब भी काम का है।
- "क़दम-दर-क़दम सोचो" — "सोचने वाले" मॉडलों के बारे में OpenAI के डेवलपर दस्तावेज़ (प्रोग्रामरों के लिए लिखी गाइड) कहते हैं कि "चेन-ऑफ़-थॉट" यानी "क़दम-दर-क़दम सोचो" वाले निर्देशों से बचें, क्योंकि ये मॉडल अंदर ही अंदर ख़ुद सोच-विचार करते हैं; इसलिए उनसे क़दम-दर-क़दम सोचने को कहने की ज़रूरत नहीं है, और इससे उनका काम बिगड़ भी सकता है। अमेरिका के व्हार्टन स्कूल के एक अध्ययन (जून 2025) में सोचने वाले मॉडलों के बारे में भी यही पाया गया: फ़ायदा 3% से ज़्यादा नहीं हुआ, एक मॉडल में तो 3% का नुक़सान हुआ, और जवाब आने में 20 से 80% ज़्यादा समय लगा।
- "कृपया", "मैं आपको $1,000 दूँगा", "मेरा करियर इसी पर टिका है" — व्हार्टन के एक और अध्ययन (अगस्त 2025) में सीधे-सादे सवाल की तुलना आठ तरह के दबाव वाले सवालों से की गई, जिनमें पैसे का वादा और धमकियाँ भी शामिल थीं। इनमें से किसी का भी असर हर बार एक जैसा नहीं रहा। ऊपर से, ये फ़ालतू बातें रुकावट बनती हैं: मॉडल आपके सवाल के बजाय इन्हीं का जवाब देने लगता है।
- ख़ास चिह्न और टैग जैसे कोड-निशान — आम इंसान को इनकी ज़रूरत नहीं है। Anthropic लिखती है कि आज के मॉडल इनके बिना भी आपकी लिखी बात का ढाँचा समझ लेते हैं: साधारण पैराग्राफ़, शीर्षक और ख़ाली लाइनें भी उतना ही अच्छा काम करती हैं।
बेशक, विनम्रता से बात करने पर कोई रोक नहीं है — बस इतना जान लीजिए कि इससे जवाब अच्छा या बुरा नहीं होता।
वह फ़ॉर्मूला जो सच में काम करता है
मुख्य बातों पर तीनों कंपनियाँ — OpenAI, Anthropic और Google — अपनी-अपनी आधिकारिक गाइड में एक जैसी बात कहती हैं। उनकी साझा बातें यहाँ पाँच ख़ानों में रखी गई हैं:
Google ने अपने दफ़्तरी ऐप (Workspace) इस्तेमाल करने वालों के लिए जो गाइड बनाई है, उसके मुताबिक़ सबसे कामयाब सवाल औसतन लगभग 21 शब्दों के थे, जबकि लोग असल में आम तौर पर 9 से कम शब्दों का सवाल लिखते हैं। यानी नए लोगों की आम ग़लती बस एक है: सवाल बहुत छोटा होना। "शिकायत लिखो" नहीं, बल्कि दो-तीन वाक्य, जिनमें पूरी बात हो।
तीन आदतें जो किसी भी नुस्ख़े से ज़्यादा काम की हैं
- बात न बने, तो सुधार करवाइए — नए सिरे से शुरू मत कीजिए। तीनों आधिकारिक गाइड में यही सलाह सबसे ज़्यादा दी गई है; OpenAI ने तो इसका नाम भी रखा है — "बार-बार सुधार करना"। कहिए: "बहुत लंबा है, आधा कर दीजिए", "बहुत औपचारिक है", "तीसरी बात समझ नहीं आई — उसे और विस्तार से समझाइए"। तीन-चार बार सुधार करवाने से जो नतीजा मिलता है, वह पहली बार में लिखा कितना भी बढ़िया वाक्य नहीं दे सकता।
- दस्तावेज़ जोड़िए, उसकी बातें अपने शब्दों में मत दोहराइए। पेपरक्लिप वाला निशान दबाइए → PDF या फ़ोटो चुनिए। तब जवाब असली दस्तावेज़ में लिखी बातों पर आधारित होगा, न कि मॉडल की याददाश्त पर। मनगढ़ंत बातों से बचने का यह सबसे मज़बूत तरीक़ा है।
- उससे कहिए कि वह आपसे सवाल पूछे। Google की अपनी गाइड ठीक यही तरीक़ा सुझाती है — "आपके पास मेरे लिए कौन-से सवाल हैं, जिनसे आपको सबसे अच्छा नतीजा देने में मदद मिले?" नए इस्तेमाल करने वाले के लिए यह सबसे बड़ा सहारा है: आपको नहीं पता कि कौन-सी बातें छूट गई हैं, पर मॉडल को पता है।
बारह तैयार सवाल
"कॉपी करें" बटन दबाइए, फिर चैट में चिपकाइए (पेस्ट कीजिए), और रंगीन हिस्सों की जगह अपनी जानकारी लिखिए।
- "और आसान करके समझाइए, जैसे 10 साल के बच्चे को समझाते हैं।" — जब जवाब उलझा हुआ हो।
- "बहुत लंबा है। इसे पाँच वाक्यों में समेट दीजिए।" — जब जवाब तीन स्क्रीन भर दे।
- "अगर आपको पक्का नहीं पता, तो मनगढ़ंत जवाब देने के बजाय साफ़ कह दीजिए।" — Anthropic ख़ास तौर पर सलाह देती है कि मॉडल को यह इजाज़त दी जाए, ताकि मनगढ़ंत जवाब कम हों।
तैयार सवाल 08 लीजिए और उसकी मदद से कोई ऐसा असली संदेश लिखवाइए जो आपको वैसे भी लिखना था। फिर उसे तीन बार सुधरवाइए: "और छोटा कीजिए", "थोड़ा और अपनापन लाइए", "यह भी जोड़िए कि वे मुझे वापस फ़ोन करें"। देखिए कि संदेश हर बार कैसे बदलता है।
यह पूरे भरोसे से ग़लत बताता है
यह इस कोर्स का सबसे ज़रूरी पाठ है। इसलिए नहीं कि AI बुरा है, बल्कि इसलिए कि उसकी ग़लतियों का बाहर से कोई निशान नहीं दिखता — वे बिल्कुल सही जवाबों जैसी ही दिखती हैं।
असल में यह कैसा दिखता है
इस चीज़ का एक नाम है — मनगढ़ंत जवाब (अंग्रेज़ी में "hallucination"), यानी अपने मन से गढ़ी हुई बात। मॉडल जान-बूझकर झूठ नहीं बोलता, और उसे पता भी नहीं होता कि उसने ग़लती की है। वह ऐसे वाक्य जोड़ता जाता है जो सुनने में सही लगें, और जहाँ तथ्य ख़त्म हो जाते हैं, वहाँ ख़ाली जगह अपनी तरफ़ से भर देता है। तीन असली उदाहरण:
ऐसे मुक़दमे जो कभी हुए ही नहीं
अक्टूबर 2026 तक शोधकर्ता Damien Charlotin के डेटाबेस में 2,100 से ज़्यादा ऐसे अदालती फ़ैसले दर्ज हो चुके थे, जिनमें AI ने ऐसे मुक़दमों के हवाले गढ़ दिए जो कभी हुए ही नहीं। हमारे लिए ज़रूरी बात यह है: जिन लोगों की यह ग़लती पकड़ी गई, उनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी जो अदालत में बिना वकील के अपना मुक़दमा ख़ुद लड़ रहे थे। यानी वे वकील नहीं थे।
ऐसी किताबें जो हैं ही नहीं
मई 2025 में अमेरिकी अख़बारों Chicago Sun-Times और Philadelphia Inquirer ने गर्मियों में पढ़ने लायक़ किताबों की एक सूची छापी, जिसे AI ने तैयार किया था। इनमें से कुछ किताबें हैं ही नहीं — उनके नाम गढ़े गए थे और असली लेखकों के नाम पर डाल दिए गए थे। अमेरिका की Library of Virginia का अनुमान है कि उसे ईमेल से जानकारी माँगने वाले जो सवाल मिलते हैं, उनमें से लगभग 15% अब ChatGPT से लिखे होते हैं, और इनमें से कुछ में ऐसी किताबें और दस्तावेज़ माँगे जाते हैं जो हैं ही नहीं।
परहेज़ की जगह ज़हर
60 साल के एक आदमी ने ChatGPT से पूछा कि खाने वाले नमक की जगह वह क्या इस्तेमाल कर सकता है। उसने जवाब को सोडियम ब्रोमाइड लेने की सलाह समझा, तीन महीने तक उसे लेता रहा, और ब्रोमिज़्म (ब्रोमाइड से होने वाला ज़हर) की वजह से तीन हफ़्ते अस्पताल में रहा: बेवजह शक और डर, मतिभ्रम (ऐसी चीज़ें दिखना-सुनना जो हैं ही नहीं), नींद न आना, शरीर का संतुलन बिगड़ना। यह मामला अगस्त 2025 में मेडिकल पत्रिका Annals of Internal Medicine: Clinical Cases में छपा।
यह कितनी बार होता है — आँकड़ों में
OpenAI अपने मॉडलों पर इसे मापती है। इसके लिए ऐसे सवाल चुने जाते हैं जो जान-बूझकर कठिन न हों, बल्कि असली बातचीत जैसे हों, और उन जवाबों को गिना जाता है जिनमें कम से कम एक बड़ी ग़लत बात हो। कंपनी ने जो सबसे साफ़ नतीजा छापा है, वह इंटरनेट पर खोज (वेब सर्च) के बारे में है: इन जाँचों में उसका मॉडल तब सबसे कम गंभीर ग़लतियाँ करता है, जब इंटरनेट पर खोज चालू होती है।
वेब सर्च चालू करने से मनगढ़ंत जवाब बहुत कम हो जाते हैं। यह सवाल को चतुराई से घुमा-फिराकर लिखने की किसी भी तरकीब से कहीं ज़्यादा काम करता है। अगर आपका सवाल किसी तथ्य के बारे में है — दाम, क़ानून, तारीख़ें, दवाइयाँ, ख़बरें — तो हमेशा कहिए कि वह इंटरनेट पर खोजे और आपको लिंक दे।
लेकिन यह भी हर मर्ज़ की दवा नहीं है। अमेरिका की स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी ने क़ानूनी काम के लिए बने पेशेवर AI सिस्टम जाँचे, जो ख़ास तौर पर दस्तावेज़ों के एक असली डेटाबेस के सहारे काम करते हैं — फिर भी वे 17 से 33% मामलों में ग़लती करते रहे (यह शोध 2024 से 2025 का है; तब से मॉडल बेहतर हुए हैं)। नतीजा वही रहता है: स्रोतों का सहारा लेने से बहुत मदद मिलती है, लेकिन जाँचने की ज़रूरत ख़त्म नहीं होती।
कैसे जाँचें — आम इंसान के लिए चार तरीक़े
- लिंक माँगिए — और उन्हें खोलिए। सच में खोलिए, सिर्फ़ यह देखकर संतोष न कर लीजिए कि वे "भरोसेमंद लगते हैं"। गढ़ा हुआ लिंक भी बिल्कुल सही दिखता है। चैट में लिखने के लिए एक वाक्य: "मुझे अपने स्रोतों के लिंक दीजिए और बताइए कि आप ठीक-ठीक किन बातों पर पक्के नहीं हैं।"
- जाँचिए कि स्रोत सच में मौजूद है। किताब, क़ानून या लेख का ठीक-ठीक नाम कॉपी कीजिए और उसे किसी आम सर्च इंजन में डालकर खोजिए। कुछ नहीं मिला, तो समझ लीजिए कि वह गढ़ा हुआ था।
- वही सवाल किसी दूसरे ढंग से, नई चैट में पूछिए। अगर जवाब बदल जाए, तो मॉडल को जवाब पता नहीं है — वह अंदाज़ा लगा रहा है।
- कोई भी ज़रूरी बात किसी इंसान से पक्की कीजिए। डॉक्टर, वकील, आपका बैंक, सरकारी सेवाओं की वेबसाइट। AI किसी विशेषज्ञ से बात करने की तैयारी कराने में बहुत अच्छा है, लेकिन विशेषज्ञ की जगह नहीं ले सकता।
चैट में क्या कभी नहीं लिखना चाहिए
सबसे ज़रूरी बात: AI से हुई बातचीत गोपनीय नहीं मानी जाती — क़ानून उसे कोई भी ख़ास सुरक्षा नहीं देता। यह डॉक्टर, वकील या धर्मगुरु से हुई बातचीत जैसी नहीं है। OpenAI के प्रमुख सैम ऑल्टमैन ने जुलाई 2025 में यह साफ़-साफ़ कहा था: अगर अदालत में मुक़दमा चले, तो कंपनी को बातचीत सौंपने का आदेश दिया जा सकता है।
और यह कोई कोरी कल्पना नहीं है। 5 जनवरी 2026 को अमेरिका के एक संघीय (फ़ेडरल) जज ने वह आदेश बरक़रार रखा, जिसके तहत OpenAI को इस्तेमाल करने वालों की 20 मिलियन बातचीत का एक नमूना मुक़दमा करने वालों के हवाले करना होगा — नाम और पहचान हटाकर, लेकिन ये असली, जीते-जागते लोगों की बातचीत हैं, जिन्होंने इसके लिए कभी हामी नहीं भरी।
- पासपोर्ट या पहचान पत्र की जानकारी, कोई भी राष्ट्रीय पहचान नंबर या टैक्स नंबर — आधार नंबर, पैन नंबर, अमेरिका का Social Security नंबर, ब्रिटेन का National Insurance नंबर, कनाडा का SIN, ऑस्ट्रेलिया का TFN, आयरलैंड का PPS नंबर
- एक बार वाले कोड (OTP)। वह नंबर जो लॉगिन करते या पैसे चुकाते समय SMS से या किसी ऐप में आता है। किसी बैंक, किसी पुलिस वाले, किसी डिलीवरी कंपनी और किसी AI सेवा को इसकी कभी ज़रूरत नहीं होती। जो भी इसे माँगे, वह ठग है।
- कार्ड और बैंक खाते के नंबर, PIN, पासवर्ड, क्रिप्टो वॉलेट के सीड फ़्रेज़ (वे गुप्त शब्द जिनसे वॉलेट खुलता है)
- दस्तावेज़ों की फ़ोटो — पासपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट, बीमा पॉलिसी, डॉक्टर का पर्चा
- पूरा मेडिकल रिकॉर्ड, जिस पर आपका नाम और आपकी बीमारियाँ लिखी हों
- किसी चल रहे मुक़दमे या झगड़े से जुड़ी कोई भी बात
- दूसरे लोगों की निजी जानकारी — किसी रिश्तेदार की सेहत, किसी और के पैसों का हिसाब और पता
- काम के राज़: कोड, अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट), ग्राहकों की सूचियाँ, मीटिंग में हुई बातों का लिखित ब्योरा
- ऐसी कोई भी बात जो आप सिर्फ़ डॉक्टर को भरोसे में बताते
भारत का डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन क़ानून (DPDP Act) आपको यह हक़ देता है कि आप कंपनी से पूछें कि उसके पास आपका कौन-सा डेटा है और उसे मिटाने को कहें। लेकिन ये अधिकार मई 2027 से लागू होंगे। तब तक ऐप की सेटिंग्स ही आपका मुख्य साधन हैं — इसलिए पाठ 2 की सेटिंग्स ज़रूर देख लीजिए।
ब्रिटेन और यूरोपीय संघ में रहने वालों के पास GDPR के तहत ये अधिकार अभी से हैं: OpenAI, Anthropic या Google को आम तौर पर एक महीने में जवाब देना होता है, और जवाब न आए तो डेटा सुरक्षा संस्था में शिकायत मुफ़्त है — ब्रिटेन में Information Commission (जिसे अब भी ICO कहा जाता है)। अमेरिका में ऐसा कोई देशव्यापी क़ानून नहीं है; कैलिफ़ोर्निया जैसे कुछ राज्य जानने और मिटवाने का अधिकार देते हैं।
यह बेवजह का डर क्यों नहीं है — जो पहले ही हो चुका है
- Samsung, 2023। कर्मचारियों को ChatGPT इस्तेमाल करने की छूट मिलने के 20 दिन के अंदर ही वे तीन बार काम की गोपनीय चीज़ें उसमें डाल चुके थे: सोर्स कोड, कंपनी का अंदरूनी कोड और एक मीटिंग का लिखित ब्योरा। कंपनी ने अपने काम के फ़ोन-कंप्यूटर और अंदरूनी नेटवर्क पर जनरेटिव AI (ऐसा AI जो ख़ुद लिखता है और तस्वीरें बनाता है) पर रोक लगा दी।
- ChatGPT, 2025 की गर्मियाँ। "इस चैट को खोज में दिखने दें" जैसी एक सुविधा की वजह से लगभग 4,500 बातचीत Google सर्च में दिखने लगीं — इनमें मानसिक सेहत और पारिवारिक मामलों की बातचीत भी थी। अगस्त 2025 में यह सुविधा हटा दी गई। ध्यान दें: इसका असर सिर्फ़ उन चैट पर पड़ा, जिन्हें इस्तेमाल करने वालों ने ख़ुद सबके लिए खुला (पब्लिक) बनाया था।
- Chat & Ask AI ऐप, 2026 की शुरुआत। सर्वर की एक ग़लत सेटिंग की वजह से 25 मिलियन इस्तेमाल करने वालों के लगभग 300 मिलियन संदेश खुले में पड़े रहे, जिन्हें कोई भी देख सकता था — पूरी की पूरी बातचीत। इस ऐप को 50 मिलियन से ज़्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं। सिर्फ़ आधिकारिक ऐप ही इस्तेमाल करने की यह एक और वजह है।
- दिसंबर 2025। Chrome ब्राउज़र के दो एक्सटेंशन (ब्राउज़र में जोड़े जाने वाले छोटे प्रोग्राम), जिन्हें कुल मिलाकर 900,000 से ज़्यादा बार इंस्टॉल किया गया था, चुपचाप लोगों की बातचीत अपराधियों के सर्वर पर भेज रहे थे।
अलग से, और ध्यान से: अकेलेपन के बारे में
AI से बात करना अच्छा लगता है। वह हमेशा मौजूद रहता है, कभी चिढ़ता नहीं, हमेशा हाँ में हाँ मिलाता है। यह आख़िरी बात कोई ख़ूबी नहीं है, बल्कि उसे बनाया ही ऐसे गया है: मॉडल इस तरह तैयार किए जाते हैं कि वे लोगों को पसंद आएँ, उनसे बहस न करें।
सितंबर 2025 में अमेरिका के संघीय व्यापार आयोग (FTC) ने उन सात कंपनियों की औपचारिक जाँच शुरू की, जिनके चैटबॉट (बात करने वाले कंप्यूटर प्रोग्राम) साथी और दोस्त होने का दिखावा करते हैं। इस सरकारी संस्था का ध्यान बच्चों और किशोरों पर है, लेकिन हमेशा हाँ में हाँ मिलाने वाले साथी से लगाव बड़ों में भी बिल्कुल इसी तरह पैदा होता है, और अकेले लोगों पर इसका असर और भी गहरा हो सकता है।
सच कहें तो शोध से मिली-जुली तस्वीर बनती है। कुछ अध्ययनों में चैटबॉट से बात करने पर अकेलापन कम महसूस हुआ — पर थोड़े समय के लिए, एक हफ़्ते के अंदर। और एक साल चला एक अध्ययन भी है, जिसमें चार पश्चिमी देशों के दो हज़ार से ज़्यादा लोग शामिल थे। उसमें साथी की तरह चैटबॉट का बढ़ता इस्तेमाल, उल्टा, आगे चलकर बढ़ते अकेलेपन का संकेत निकला (लेखक ख़ुद इसे शुरुआती खोज मानते हैं, पक्का नतीजा नहीं)। लगता है, सारा फ़र्क़ एक बात से पड़ता है:
असली लोगों के साथ-साथ AI अच्छा है, और उनकी जगह बुरा। ख़तरे का संकेत तब है, जब आप अपनी सबसे निजी बातें किसी इंसान के बजाय चैट को बताने लगें। अगर यह बात आप पर या आपके किसी अपने पर लागू होती है, तो यह किसी असली इंसान से बात करने की वजह है, कोई सेटिंग बदलने की नहीं।
AI और ठग
जो औज़ार चिट्ठी लिखने में आपकी मदद करता है, वही ठगों की भी मदद करता है — आपको चिट्ठी लिखने में। और आपकी बेटी की आवाज़ की नक़ल बनाने में भी।
ख़तरा कितना बड़ा है — FBI के आधिकारिक आँकड़े
ये अमेरिका के आँकड़े हैं। ये अमेरिका की जाँच एजेंसी FBI की 2025 की साइबर अपराध रिपोर्ट से लिए गए हैं (यह रिपोर्ट अप्रैल 2026 में छपी)। इस रिपोर्ट में पहली बार AI पर एक अलग हिस्सा था। आपका देश भी लगभग पक्के तौर पर अपने आँकड़े छापता है। असली बात रुझान है, ठीक-ठीक संख्याएँ नहीं।
स्कीम 1. नक़ली आवाज़ — "आपके पोते का फ़ोन"
FBI के मुताबिक़ यह ऐसे होता है: अपराधी आपके किसी अपने की आवाज़ में छोटी-छोटी ऑडियो क्लिप बनाते हैं, किसी मुसीबत का नाटक करते हैं और फ़ौरन पैसे माँगते हैं — या फिरौती माँगते हैं।
आवाज़ किसी भी ऐसे वीडियो से ले ली जाती है जिसे कोई भी देख सकता है: सोशल मीडिया पर जन्मदिन की बधाई, कोई वॉइस मैसेज, स्कूल के कार्यक्रम की कोई क्लिप। बस कुछ सेकंड की रिकॉर्डिंग काफ़ी है। सुरक्षा कंपनी McAfee के एक सर्वे (2023, सात देश, 7,000 लोग) में हर चार में से एक व्यक्ति ने कहा कि उनका या उनके किसी जानने वाले का सामना आवाज़ की नक़ल वाली ठगी से हो चुका है।
इसका एक और भी डरावना रूप है — "वर्चुअल किडनैपिंग", यानी नक़ली अपहरण: नक़ल की गई आवाज़ और साथ में नक़ली तस्वीरें, ताकि परिवार को यक़ीन हो जाए कि उनके किसी अपने को अगवा कर लिया गया है।
अपने परिवार के साथ एक कोड वर्ड तय कर लीजिए। FBI की चेतावनी के शब्दों में: "अपने परिवार के साथ मिलकर एक गुप्त शब्द या छोटा वाक्य बनाइए, ताकि आप उनकी पहचान पक्की कर सकें।"
- शब्द बेमतलब हो और उसका आपसे कोई लेना-देना न हो: पालतू जानवर का नाम नहीं, माँ का शादी से पहले वाला सरनेम नहीं, उस गली का नाम नहीं जहाँ आप बड़े हुए — ये सब बातें बहुत पहले ही लीक होकर तरह-तरह के डेटाबेस में पहुँच चुकी हैं। कुछ ऐसा, जैसे "बैंगनी केतली"।
- इसे आमने-सामने मिलकर ज़ुबानी बताइए। इसे किसी मैसेज में मत लिखिए।
- सबको बताइए: माता-पिता, बच्चे, नाती-पोते, पति या पत्नी।
- कोड वर्ड दूसरी जाँच है, अकेली जाँच नहीं। पहली जाँच यह है: फ़ोन काटिए और ख़ुद वापस फ़ोन कीजिए।
- जल्दबाज़ी। "अभी के अभी", "दस मिनट बाद बहुत देर हो जाएगी"।
- बात छिपाने को कहना। "बस मम्मी को मत बताना", "किसी को फ़ोन मत करना"।
- वे आपसे कोई कोड पढ़कर सुनाने को कहते हैं। अभी-अभी SMS पर एक बार इस्तेमाल होने वाला कोड (OTP) आया है, और वे उसे "आपकी पहचान जाँचने के लिए" माँगते हैं। पूरी ठगी यही है — कोड बताने का मतलब है अपना खाता या अपने पैसे उनके हवाले कर देना।
- पैसे देने का अजीब तरीक़ा। किसी और के कार्ड पर ट्रांसफ़र, क्रिप्टोकरेंसी, गिफ़्ट कार्ड, पेमेंट ऐप, या नक़द पैसे लेने घर आया कूरियर वाला। अमेरिकी एजेंसी FTC का नियम: ऐसे किसी को कभी पैसे न दें, जो ज़िद करे कि आप सिर्फ़ क्रिप्टोकरेंसी, Western Union या MoneyGram जैसी पैसे भेजने वाली किसी सर्विस, किसी पेमेंट ऐप या गिफ़्ट कार्ड से ही पैसे दे सकते हैं। और FTC के अपने शब्दों में: "सिर्फ़ ठग ही क्रिप्टोकरेंसी में पैसे माँगते हैं।"
स्कीम 2. नक़ली वीडियो
डीपफेक ऐसा वीडियो या आवाज़ की रिकॉर्डिंग है जिसे AI से नक़ली बनाया गया हो, ताकि लगे कि उसमें कोई असली इंसान दिख रहा है या बोल रहा है। सबसे मशहूर मिसाल: ब्रिटेन की इंजीनियरिंग कंपनी Arup के हांगकांग दफ़्तर के एक कर्मचारी ने एक वीडियो कॉल के बाद कुल लगभग $25 मिलियन के 15 ट्रांसफ़र कर दिए। उस कॉल में उसके अलावा बाक़ी सभी लोग, कंपनी के फ़ाइनेंस प्रमुख समेत, नक़ली थे — उन्हें कंपनी के बड़े अधिकारियों के ऐसे वीडियो से जोड़कर बनाया गया था जिन्हें कोई भी देख सकता था। जनवरी 2026 में स्विट्ज़रलैंड के श्वीत्स कैंटन की एक कंपनी ने ऐसी ही एक चाल में कई मिलियन फ़्रैंक गँवा दिए, फ़र्क़ बस इतना था कि यहाँ सिर्फ़ आवाज़ इस्तेमाल हुई: दो हफ़्तों तक एक व्यक्ति फ़ोन करता रहा और AI से बदली गई आवाज़ में कंपनी के मालिक का एक जाना-पहचाना कारोबारी साझेदार बनकर बात करता रहा।
आम लोगों को बड़े पैमाने पर फँसाने के लिए ठग ऐसे विज्ञापन चलाते हैं, जिनमें "मशहूर लोग" किसी निवेश की सलाह देते दिखते हैं। ब्रिटेन में सबसे ज़्यादा जिनकी नक़ल बनाई जाती है, वे हैं पैसों के मामलों के पत्रकार मार्टिन लुईस। 2022 और 2023 में ब्रिटेन की ठगी-शिकायत सेवा Action Fraud को मिली शिकायतों में जितनी बार किसी मशहूर हस्ती का नाम आया, उनमें से लगभग एक-तिहाई (32%) बार नाम उन्हीं का था। BBC के दर्ज किए एक मामले में £76,000 का नुक़सान हुआ।
FBI की सलाह अब भी यही है कि उँगलियों, दाँतों और परछाइयों को ध्यान से देखिए — लेकिन सिर्फ़ इसी के भरोसे नहीं रहा जा सकता। 56 अध्ययनों की एक समीक्षा के मुताबिक़ इंसान औसतन लगभग 55% बार सही पहचान पाते हैं, यानी लगभग सिक्का उछालने जितना। iProov कंपनी के 2,000 लोगों पर किए एक प्रयोग में सिर्फ़ 0.1% — यानी दो हज़ार में से लगभग दो लोग — सब कुछ सही पहचान पाए, जबकि 60% से ज़्यादा लोगों को पूरा भरोसा रहा कि वे पहचान सकते हैं, चाहे असल में पहचान पाते हों या नहीं।
इसलिए काम "ध्यान से देखना" नहीं आता, बल्कि यह आता है:
- फ़ोन काटिए और ख़ुद वापस फ़ोन कीजिए — उस नंबर पर जो पहले से आपके पास है। उस नंबर पर नहीं जो आपको अभी बताया गया। यह ख़ुद FBI की सलाह है।
- किसी दूसरे रास्ते से जाँचिए। फ़ोन आया है, तो मैसेज भेजिए। वीडियो आया है, तो उस रिश्तेदार को फ़ोन कीजिए।
- कोड वर्ड।
- पैसों का नियम: अगर वे ज़िद करें कि पैसे देने का एक ही तरीक़ा है — पैसे भेजने वाली कोई सर्विस, किसी अनजान के कार्ड पर ट्रांसफ़र, क्रिप्टोकरेंसी या गिफ़्ट कार्ड — तो वे ठग हैं।
- "कोई मशहूर हस्ती इस निवेश की सलाह दे रही है" — इस पर: अगर यह सच होता, तो आम अख़बार और न्यूज़ चैनल इसकी ख़बर दे रहे होते, और यह बात उस व्यक्ति के अपने आधिकारिक पेज या चैनल पर भी होती। सोशल मीडिया पर आपके सामने आया कोई विज्ञापन कुछ साबित नहीं करता।
स्कीम 3. AI के लिखे ईमेल और मैसेज
ऐसे मैसेज जितने ईमेल पर आते हैं, उतने ही WhatsApp और Telegram पर भी — बहुत से लोगों के पास तो वहीं कहीं ज़्यादा आते हैं। किसी अनजान नंबर से मैसेज, जिसकी फ़ोटो में किसी कंपनी का लोगो हो, आपको किसी "निवेश" ग्रुप में जोड़ लिया जाना, नए नंबर से किसी "दोस्त" का मैसेज, वीडियो कॉल के दौरान अपनी स्क्रीन दिखाने (शेयर करने) को कहना, आपको फ़ॉरवर्ड की गई कोई सरकारी-सी दिखने वाली PDF फ़ाइल। नीचे दिए गए दोनों नियम हर जगह लागू होते हैं, मैसेज चाहे कहीं से भी आए।
फ़िशिंग ठगी की वह चाल है जिसमें ऐसा मैसेज भेजा जाता है मानो वह आपके बैंक, किसी डिलीवरी कंपनी या आपके किसी साथी की ओर से हो, ताकि आप अपना पासवर्ड बता दें या पैसे भेज दें। ब्रिटेन के राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र (NCSC) ने 2024 में ही इसकी चेतावनी दे दी थी: AI की मदद से ऐसे असली लगने वाले जाल बनाए जा सकते हैं "अनुवाद, स्पेलिंग और व्याकरण की उन ग़लतियों के बिना, जिनसे अक्सर फ़िशिंग पकड़ में आ जाती है", और जल्द ही "हर किसी के लिए, चाहे वह साइबर सुरक्षा को कितना भी समझता हो, यह परखना मुश्किल होगा कि कोई ईमेल या पासवर्ड रीसेट करने की माँग असली है या नहीं"। आज, 2026 में, यह बात सच हो चुकी है।
हम सबको सिखाया गया था कि "ठग टाइपिंग की ग़लतियों और ग़लत-सलत अंग्रेज़ी से पकड़े जाते हैं"। इसे भूल जाइए। आज किसी ठग की चिट्ठी आपके डॉक्टर के क्लिनिक से आई चिट्ठी से भी अच्छी लिखी होती है। उसे इस बात से मत परखिए कि वह कैसे लिखी गई है, बल्कि इससे परखिए कि वह आपसे माँग क्या रही है।
अब किन बातों पर ध्यान दें:
- जल्दबाज़ी और धमकी ("24 घंटे में आपका खाता बंद कर दिया जाएगा")
- ईमेल में दिए लिंक पर जाकर "अपनी जानकारी कन्फ़र्म करने" को कहना
- किसी जानी-पहचानी कंपनी या संस्था के बिल में बैंक खाते का ब्योरा बदला हुआ होना
- पैसे देने का कोई अनजाना तरीक़ा
- मैसेज में दिए गए फ़ोन नंबर, लिंक या पते का कभी इस्तेमाल मत कीजिए। वेबसाइट का पता ख़ुद टाइप करके जाइए, या अपने कार्ड या बिल पर छपे नंबर पर फ़ोन कीजिए।
- FTC की चेतावनी है कि इंटरनेट पर कुछ खोजने (सर्च करने) पर सबसे ऊपर दिखने वाले नतीजे पैसे देकर लगाए गए विज्ञापन हो सकते हैं, और कभी-कभी ठग भी ये विज्ञापन ख़रीदते हैं। नीचे स्क्रॉल करके बिना विज्ञापन वाले नतीजों तक जाइए।
FBI का एक छोटा-सा नारा है जो आसानी से याद रहता है: "Take a Beat" — यानी, ज़रा रुकिए। ठगी जल्दबाज़ी के दम पर चलती है। पाँच मिनट रुक जाने से लगभग हर चाल नाकाम हो जाती है।
कोई शक वाला मैसेज आए, तो उसे पाठ 3 के तैयार सवाल 12 के साथ चैट में चिपका दीजिए। AI एक-एक बिंदु करके बताएगा कि क्या गड़बड़ लग रहा है। यह ठीक वैसा काम है जिसमें AI माहिर है: तथ्य याद करने के बजाय लिखी हुई बात को परखना।
स्कीम 4. वीडियो कॉल पर "पुलिस अफ़सर" — डिजिटल अरेस्ट
यह "पोते के फ़ोन" वाली ठगी का उल्टा रूप है: यहाँ मुसीबत में फँसा कोई रिश्तेदार नहीं होता, बल्कि कोई अधिकारी आप पर आरोप लगाता है। कोई ख़ुद को पुलिस अफ़सर, कस्टम अधिकारी, टैक्स इंस्पेक्टर या बैंक के सुरक्षा विभाग का बताकर वीडियो कॉल करता है; किसी मैसेजिंग ऐप पर सरकारी-सी दिखने वाली चिट्ठी आती है; आपसे कहा जाता है कि कैमरे के सामने बने रहिए, किसी को कुछ मत बताइए, और "जाँच के लिए" या "किसी सुरक्षित खाते में" पैसे ट्रांसफ़र कर दीजिए। कई देशों में AI के सहारे होने वाली यह सबसे बड़ी ठगी है, और यह इसलिए कामयाब होती है क्योंकि डर के मारे लोग जाँच नहीं करते। भारत में इसे "डिजिटल अरेस्ट" कहा जाता है। सितंबर 2026 में FBI ने चेतावनी दी कि ठग अब AI की मदद से वीडियो कॉल पर पुलिस अफ़सर और सरकारी अधिकारी बनकर सामने आते हैं।
दुनिया में कहीं भी कोई पुलिस, टैक्स विभाग, कस्टम विभाग या बैंक वीडियो कॉल या मैसेजिंग ऐप पर किसी को गिरफ़्तार नहीं करता, पूछताछ नहीं करता और जुर्माना नहीं लगाता। और इनमें से कोई भी आपसे कभी पैसे किसी "सुरक्षित खाते" में भेजने को नहीं कहेगा। फ़ोन काट दीजिए। फिर उस संस्था को ऐसे नंबर पर फ़ोन कीजिए जो आपने ख़ुद ढूँढा हो।
अगर ठगी हो ही चुकी है
- किसी नक़ली ऐप के लिए आपके पैसे कट गए: Apple — reportaproblem.apple.com (सब्सक्रिप्शन अलग से रद्द कीजिए: Settings → आपका नाम → Subscriptions)। Android — support.google.com/googleplay, रिफ़ंड (पैसे वापसी) वाला हिस्सा।
- आपने अपने कंप्यूटर पर कोई नक़ली प्रोग्राम चला दिया: मानकर चलिए कि आपके पासवर्ड और ब्राउज़र सेशन चोरी हो चुके हैं — ब्राउज़र सेशन वह चीज़ है जिसकी वजह से आप वेबसाइटों पर लॉग-इन बने रहते हैं। अपने पासवर्ड किसी दूसरे फ़ोन या कंप्यूटर से बदलिए, सबसे पहले ईमेल और बैंक के।
- आपने पैसे भेज दिए: सबसे पहले अपने बैंक को फ़ोन कीजिए, उसी घंटे के अंदर। कभी-कभी ट्रांसफ़र को अब भी रोका या वापस मँगाया जा सकता है। फिर इसकी शिकायत दर्ज कीजिए — नीचे दी गई टेबल में आपके देश का नंबर है।
- शर्मिंदा मत होइए। बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के फ़ाइनेंस प्रमुख तक इन चालों में फँस जाते हैं। चुप रहने से सिर्फ़ ठग का फ़ायदा होता है — अपने क़रीबी लोगों को बताइए, ताकि वे भी सावधान हो जाएँ।
कहाँ शिकायत करें — अपना देश ढूँढिए। शिकायत से ही पैसा रोका जा सकता है और अगले व्यक्ति को चेतावनी मिलती है। आपातकालीन नंबर (भारत में 112, अमेरिका और कनाडा में 911, ब्रिटेन में 999, ऑस्ट्रेलिया में 000; खाड़ी देशों और नेपाल के पुलिस नंबर तालिका में हैं) तभी मिलाइए जब किसी की जान को तुरंत ख़तरा हो।
| देश | फ्रॉड की शिकायत कहाँ करें |
|---|---|
| भारत — पैसा चला गया | तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जल्दी बताने से पैसा ठगों तक पहुँचने से पहले रोका जा सकता है। उसी समय अपने बैंक को भी बताइए |
| भारत — बिना आपकी मर्ज़ी के बैंक या UPI से पैसा कटा | उसी समय अपने बैंक या पेमेंट ऐप को बताइए — जितनी देर होगी, पैसा वापस मिलने की उम्मीद उतनी कम होगी। बैंक 30 दिन में जवाब न दे या जवाब ठीक न लगे, तो RBI लोकपाल में मुफ़्त शिकायत करें: cms.rbi.org.in या टोल-फ़्री 14448 |
| भारत — संदिग्ध कॉल, SMS या WhatsApp संदेश | संचार साथी पोर्टल (sancharsaathi.gov.in) की चक्षु सुविधा में रिपोर्ट करें। वहीं आप देख सकते हैं कि आपके नाम पर कौन-कौन से मोबाइल नंबर चल रहे हैं, और खोया या चोरी हुआ फ़ोन बंद करवा सकते हैं |
| UAE | पुलिस — 999। ऑनलाइन ठगी की शिकायत दुबई पुलिस के eCrime प्लेटफ़ॉर्म (ecrimehub.gov.ae) पर, या अपने अमीरात की पुलिस में |
| सऊदी अरब | पुलिस — रियाद, मक्का और पूर्वी प्रांत में 911, बाकी प्रांतों में 999। पैसा चला गया हो, तो उसी समय अपने बैंक की 24 घंटे चलने वाली फ्रॉड हेल्पलाइन पर कॉल करें या बैंक ऐप से खाता और कार्ड तुरंत बंद करें — सऊदी केंद्रीय बैंक (SAMA) के नियम से हर बैंक को ये सुविधाएँ देनी होती हैं |
| क़तर | पुलिस — 999। ऑनलाइन ठगी: गृह मंत्रालय का साइबर अपराध निरोधक केंद्र — 2347444, हॉटलाइन 66815757, ईमेल [email protected], या Metrash2 ऐप में रिपोर्ट करें। संदिग्ध लेन-देन दिखे तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें — यह क़तर के केंद्रीय बैंक की सलाह है |
| कुवैत | पुलिस — 112। साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी: गृह मंत्रालय का इलेक्ट्रॉनिक और साइबर अपराध निरोधक विभाग — +965 97283939 (WhatsApp पर भी) |
| ओमान | पुलिस (Royal Oman Police) — 9999। ठगी की शिकायत इसी नंबर पर या किसी भी पुलिस थाने में करें; थाने चौबीसों घंटे खुले रहते हैं। ऑनलाइन ब्लैकमेल की शिकायत: 80077444 |
| बहरीन | आपातकालीन नंबर 999। साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी: गृह मंत्रालय का भ्रष्टाचार-निरोधक और आर्थिक व इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा निदेशालय — हॉटलाइन 992, WhatsApp +973 17108108, या acees.gov.bh पर फ़ॉर्म |
| नेपाल | पुलिस — 100। ऑनलाइन ठगी: नेपाल पुलिस का साइबर ब्यूरो (भोटाहिटी, काठमांडू)। उसकी वेबसाइट cyberbureau.nepalpolice.gov.np से "Online Financial Fraud" शिकायत फ़ॉर्म लेकर किसी भी पुलिस दफ़्तर में दें, या [email protected] पर ईमेल करें — पहचान पत्र की कॉपी, वेब पते और स्क्रीनशॉट साथ लगाएँ। बैंक शिकायत हल न करे, तो नेपाल राष्ट्र बैंक: gunaso.nrb.org.np |
| अमेरिका | ic3.gov (FBI) और reportfraud.ftc.gov। ic3.gov पता खुद टाइप करें: FBI चेतावनी देता है कि इसकी नकली कॉपियों का प्रचार डीपफेक वीडियो से हो रहा है |
| ब्रिटेन | reportfraud.police.uk या 0300 123 2040 — स्कॉटलैंड में पुलिस स्कॉटलैंड, 101। अपने बैंक से सुरक्षित बात करने के लिए 159 मिलाइए |
| कनाडा | reportcyberandfraud.canada.ca — कनाडा की राष्ट्रीय ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था; फ़ोन 1-888-495-8501, कामकाजी दिनों में |
| ऑस्ट्रेलिया | scamwatch.gov.au (यहाँ ठगी की जानकारी हिंदी में भी है) और cyber.gov.au (ReportCyber) |
| कोई और देश | पहले अपना बैंक, फिर स्थानीय पुलिस। अपने देश की सरकारी वेबसाइट पर ठगी की शिकायत का तरीक़ा खोजिए। जिस संदेश से धोखा हुआ, उसमें दिया नंबर कभी न मिलाएँ |
आज ही अपने बच्चों, माता-पिता और नाती-पोतों को फ़ोन कीजिए और एक कोड वर्ड तय कर लीजिए — ज़ुबानी, मैसेज में लिखकर नहीं। इसमें दो मिनट लगते हैं, और किसी दिन यही सब कुछ बचा सकता है।
परिशिष्ट
एक पन्ने की पर्ची
इसे छापिए और कंप्यूटर के पास रखिए।
अच्छा सवाल लिखने का फ़ॉर्मूला
लक्ष्य: लगभग 21 शब्द। नए लोगों की सबसे बड़ी ग़लती है सवाल को बहुत छोटा रखना।
पाँच वाक्य जो हमेशा काम आते हैं
- "और आसान भाषा में समझाइए, जैसे मेरी उम्र 10 साल हो।"
- "यह बहुत लंबा है। इसे पाँच वाक्यों में छोटा कीजिए।"
- "इंटरनेट पर खोजिए और मुझे अपने स्रोतों के लिंक दीजिए।"
- "अगर आपको पक्का नहीं पता, तो कुछ गढ़ने के बजाय साफ़ कह दीजिए।"
- "बेहतर जवाब देने के लिए आप मुझसे क्या पूछना चाहेंगे?"
क्या काम करता है / क्या नहीं
| काम करता है | काम नहीं करता (पुराना तरीक़ा) |
|---|---|
| पूरी जानकारी और साफ़ ब्योरे | "आप 20 साल के अनुभव वाले विशेषज्ञ हैं" |
| नए सिरे से शुरू करने के बजाय, कई बार में जवाब सुधरवाना | "क़दम-दर-क़दम सोचिए" |
| पेपरक्लिप वाले निशान से दस्तावेज़ जोड़ना | "आपको $1,000 मिलेंगे" |
| इंटरनेट पर खोज चालू करना | मिन्नतें, धमकियाँ, जल्दी का दबाव |
| AI से कहना कि वह आपसे सवाल पूछे | ख़ास निशान और टैग |
चैट में ये चीज़ें कभी न लिखें
पहचान पत्र · आधार, पैन जैसे पहचान और टैक्स नंबर · कार्ड और बैंक खाते के नंबर · पासवर्ड · OTP (एक बार का कोड) · दस्तावेज़ों की फ़ोटो · आपके नाम वाली मेडिकल रिपोर्ट · दूसरे लोगों की जानकारी · दफ़्तर की गुप्त बातें · चल रहे किसी क़ानूनी मामले से जुड़ी कोई भी बात।
AI से हुई बातचीत, डॉक्टर या वकील से हुई बात जैसी क़ानूनन गोपनीय नहीं होती। जनवरी 2026 में एक अदालत ने OpenAI को नमूने के तौर पर 20 मिलियन बातचीत सौंपने का आदेश दिया (लोगों की पहचान हटाकर)।
तथ्यों की जाँच — 4 क़दम
- लिंक माँगिए — और उन्हें खोलकर देखिए
- खोजकर पक्का कीजिए कि वह स्रोत सच में मौजूद है
- वही बात नई चैट में, दूसरे शब्दों में पूछिए
- ज़रूरी बातों के लिए किसी इंसान से पूछिए: डॉक्टर, वकील, बैंक
ठगों से अपना बचाव
- परिवार के साथ एक कोड वर्ड — यह अमेरिकी एजेंसी FBI की सलाह है। ऐसा शब्द जिसका कोई मतलब न हो, जो सिर्फ़ ज़ुबानी तय हो और कभी किसी मैसेज में न लिखा जाए।
- फ़ोन काटिए और ख़ुद वापस फ़ोन कीजिए — उस नंबर पर जो आपके पास पहले से है।
- दूसरे रास्ते से जाँचिए — फ़ोन आया है, तो मैसेज भेजकर पूछिए।
- अगर वे पैसे भेजने वाली किसी सर्विस, किसी अनजान के कार्ड पर ट्रांसफ़र, क्रिप्टोकरेंसी या गिफ़्ट कार्ड की ज़िद करें — तो वे ठग हैं।
- साफ़-सुथरी, सही भाषा अब किसी बात का सबूत नहीं है। यह देखिए कि माँगा क्या जा रहा है, यह नहीं कि लिखा कैसे गया है।
- पाँच मिनट रुक जाना लगभग हर चाल को नाकाम कर देता है।
ऐप: नक़ली ऐप से बचिए
ऐप सिर्फ़ ऐप स्टोर से, और वहाँ ख़ुद खोजकर ही इंस्टॉल कीजिए। डेवलपर (ऐप बनाने वाली कंपनी) का नाम ठीक यही होना चाहिए: OpenAI या OpenAI OpCo, LLC / Anthropic PBC / Google LLC (iPhone पर: Google)। हर हफ़्ते पैसे कटने वाला सब्सक्रिप्शन ठगी है।
परिशिष्ट
लिंक और स्रोत
कहाँ जाएँ
- ChatGPT — chatgpt.com · ऐप chatgpt.com/download
- Claude — claude.ai · ऐप claude.com/download
- Gemini — gemini.google.com
सीखने के लिए मुफ़्त सामग्री
- OpenAI सहायता केंद्र — help.openai.com — ChatGPT से जुड़े लगभग हर सवाल के आधिकारिक जवाब
- Claude सहायता केंद्र — support.claude.com — Claude के लिए भी यही
- OpenAI Academy — academy.openai.com — सर्टिफ़िकेट के साथ मुफ़्त कोर्स
- सवाल लिखने पर Google की गाइड (PDF) — services.google.com — छोटी, काम की, उदाहरणों से भरी
सेटिंग्स के आधिकारिक पेज
- ChatGPT में आपके डेटा की सेटिंग्स — help.openai.com/en/articles/7730893
- ChatGPT की मेमोरी — help.openai.com/en/articles/8590148
- ChatGPT में विज्ञापन — help.openai.com/en/articles/20001047 · ये कहाँ दिखाए जाते हैं — openai.com
- Claude में निजता — claude.ai/settings/data-privacy-controls
- Gemini में आपकी गतिविधि — myactivity.google.com/product/gemini
सुरक्षा से जुड़े स्रोत
- FBI, 2025 की साइबर अपराध रिपोर्ट (अप्रैल 2026) — fbi.gov · पूरी रिपोर्ट ic3.gov (PDF)
- FBI, AI की मदद से होने वाली ठगी पर चेतावनी, कोड वर्ड वाली सलाह के साथ — ic3.gov/PSA/2024/PSA241203
- FTC, आवाज़ की नक़ल (वॉइस क्लोनिंग) पर चेतावनी — consumer.ftc.gov
- FTC, ठगी से कैसे बचें, पैसे चुकाने के तरीक़े वाले नियम के साथ — consumer.ftc.gov · क्रिप्टोकरेंसी के बारे में — consumer.ftc.gov
- FTC, खोज के नतीजों में सबसे ऊपर दिखने वाले, पैसे देकर लगवाए गए विज्ञापन — consumer.ftc.gov
- FTC, दोस्त या साथी बनकर बात करने वाले AI सहायकों की जाँच — ftc.gov
- NCSC (ब्रिटेन), "साइबर ख़तरे पर AI का निकट भविष्य में असर" — ncsc.gov.uk
- कैस्परस्की, AI सर्विस के भेस में 92,000 हमले — kaspersky.co.uk
- iProov, कितने लोग सच में डीपफेक पहचान पाते हैं — iproov.com
- BBC, मार्टिन लुईस वाला डीपफेक विज्ञापन और £76,000 का नुक़सान — bbc.co.uk
- MoneySavingExpert, ठगी में जिन मशहूर लोगों के नाम इस्तेमाल हुए, उन पर Action Fraud के आँकड़ों का विश्लेषण — moneysavingexpert.com
- श्वीत्स कैंटन की पुलिस, Polizeinews के ज़रिए, स्विट्ज़रलैंड में आवाज़ की नक़ल से ठगी का मामला (जनवरी 2026) — polizeinews.ch
- इंसान डीपफेक को कितनी अच्छी तरह पहचान पाते हैं, 56 अध्ययनों की समीक्षा — sciencedirect.com
- Arup कंपनी का मामला, $25 मिलियन का नुक़सान — incidentdatabase.ai
- FBI, वीडियो कॉल पर AI की मदद से पुलिस और अधिकारी बनकर आने वाले ठग (सितंबर 2026) — ic3.gov/PSA/2026/PSA260917 · नक़ली IC3 वेबसाइटें, जिनका प्रचार डीपफेक से किया गया (जुलाई 2026) — ic3.gov/PSA/2026/PSA260720
- OpenAI, ChatGPT Work — help.openai.com · इसका क्लाउड ब्राउज़र, वेबसाइटों की अनुमतियाँ और सुरक्षा की सलाह — help.openai.com · Lockdown Mode — help.openai.com
- Anthropic, Claude Cowork का सुरक्षित इस्तेमाल, प्रॉम्प्ट इंजेक्शन (छिपे हुए निर्देश) समेत — support.claude.com · Cowork और चैट का एक ही Claude बन जाना — support.claude.com · Claude in Chrome — support.claude.com
- Google, Gemini Spark: इसे कौन और कहाँ इस्तेमाल कर सकता है, और सुरक्षित कैसे रहें — support.google.com · Mac पर फ़ाइलें मिटाना और शेयर करना — support.google.com
सटीकता और निजता से जुड़े स्रोत
- OpenAI, GPT-5.2 का मॉडल कार्ड (दिसंबर 2025) — इंटरनेट खोज के साथ और उसके बिना ग़लतियों की दर — deploymentsafety.openai.com
- स्टैनफ़ोर्ड RegLab, क़ानूनी काम के लिए बने पेशेवर AI सिस्टम की ग़लतियाँ — reglab.stanford.edu
- उन अदालती मामलों का डेटाबेस जिनमें AI के गढ़े हुए हवाले दिए गए — damiencharlotin.com/hallucinations
- Scientific American, लाइब्रेरी ऑफ़ वर्जीनिया का अनुमान: लाइब्रेरी से पूछे गए कितने सवाल AI ने लिखे — scientificamerican.com
- अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन, सेहत से जुड़े सवालों के लिए AI का सुरक्षित इस्तेमाल — ama-assn.org · सवालों की सूची (PDF)
- अदालत ने OpenAI को 20 मिलियन बातचीत सौंपने का आदेश दिया (जनवरी 2026) — natlawreview.com
- Chat & Ask AI ऐप से 300 मिलियन मैसेज का लीक होना — malwarebytes.com
- OX Security, वे Chrome एक्सटेंशन जो AI से हुई बातचीत आगे भेज देते थे — ox.security
- अकेलेपन पर शोध: थोड़े समय का अध्ययन (2025) — Journal of Consumer Research · साल भर चला अध्ययन (2026) — Psychological Science
सवाल लिखने से जुड़े स्रोत
- OpenAI, ChatGPT के लिए सवाल लिखने की सलाह — help.openai.com · "क़दम-दर-क़दम सोचिए" के बारे में — developers.openai.com
- Anthropic, 2026 के लिए सबसे अच्छे तरीक़े — claude.com/blog
- Google, सवाल लिखने की गाइड (PDF — "21 शब्द" वाले आँकड़े का स्रोत) — services.google.com · छोटे सुझाव — support.google.com
- व्हार्टन स्कूल, "सवाल लिखने में क़दम-दर-क़दम सोच का घटता फ़ायदा" — gail.wharton.upenn.edu
- व्हार्टन स्कूल, धमकी देने और इनाम का लालच देने पर अध्ययन — gail.wharton.upenn.edu
भारत, खाड़ी देशों और नेपाल के लिए स्रोत
- गृह मंत्रालय, राज्यसभा में उत्तर: राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन और ठगी का पैसा रोकने की व्यवस्था — mha.gov.in (PDF)
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल — cybercrime.gov.in
- दूरसंचार विभाग, संचार साथी और चक्षु: संदिग्ध कॉल और संदेशों की रिपोर्ट — pib.gov.in
- गृह मंत्रालय, "डिजिटल अरेस्ट" पर चेतावनी — pib.gov.in
- RBI लोकपाल: शिकायत कब और कैसे करें — rbi.org.in
- SEBI, डीपफेक निवेश वीडियो पर हिंदी में जानकारी — investor.sebi.gov.in
- OpenAI, भारत में UPI से भुगतान — help.openai.com · Google AI प्लान की भारतीय कीमतें — one.google.com · Jio के साथ Google का ऑफ़र — blog.google
- UAE सरकार, आर्थिक अपराध और ऑनलाइन ठगी की रिपोर्ट — u.ae · ऑस्ट्रेलिया, ठगी की जानकारी हिंदी में — scamwatch.gov.au
- सऊदी केंद्रीय बैंक (SAMA), बैंकों की फ्रॉड हेल्पलाइन का नियम — rulebook.sama.gov.sa · सऊदी पुलिस नंबर — visitsaudi.com
- क़तर गृह मंत्रालय, साइबर अपराध की शिकायत — portal.moi.gov.qa · क़तर केंद्रीय बैंक — qcb.gov.qa
- कुवैत गृह मंत्रालय, साइबर अपराध विभाग — moi.gov.kw · ओमान पुलिस — rop.gov.om
- बहरीन सरकारी पोर्टल, साइबर अपराध की रिपोर्ट — bahrain.bh · बहरीन गृह मंत्रालय के आपातकालीन नंबर — interior.gov.bh
- नेपाल पुलिस साइबर ब्यूरो, शिकायत कैसे करें — cyberbureau.nepalpolice.gov.np · नेपाल राष्ट्र बैंक, शिकायत — gunaso.nrb.org.np
यहाँ दी गई सारी जानकारी 4 अक्टूबर 2026 तक सही है। AI की दुनिया तेज़ी से बदलती है: मॉडलों के नाम, क़ीमतें और सेटिंग्स में चीज़ों की जगह, ये सब दो-चार महीनों में ही बदल सकते हैं। पाठ 3, 4 और 5 में बताई गई बुनियादी बातें इनसे कहीं धीरे बदलती हैं — उन्हीं पर भरोसा कीजिए।
यह सामग्री सिर्फ़ आम जानकारी के लिए है। यह डॉक्टर, वकील या वित्तीय सलाहकार की सलाह की जगह नहीं ले सकती।